Delhi Police Cyber Crime Crackdown के तहत क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन investment fraud से जुड़े एक इंटरस्टेट नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस केस में कुल 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और करोड़ों रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।
Table of Contents
Delhi Police Cyber Crime Crackdown: क्या है पूरा मामला
Delhi Police के अनुसार, यह मामला दो बड़े साइबर फ्रॉड केस से जुड़ा है—Digital Arrest fraud और Online Investment scam।
इन दोनों मामलों में आरोपियों ने लोगों को डराकर और लालच देकर पैसे ठगे।
Digital Arrest Fraud क्या होता है
इस scam में fraudsters खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर victim को डराते हैं।
मुख्य तरीका:
- victim को कॉल कर fake investigation की बात
- arrest का डर दिखाया जाता है
- “safe account” में पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है
इस केस में एक व्यक्ति से ₹47.74 लाख की ठगी की गई।
Investment Fraud कैसे किया गया
दूसरे केस में आरोपियों ने online investment scheme के नाम पर लोगों को फंसाया।
तरीका:
- social media पर high return का लालच
- fake trading platform दिखाया गया
- ₹35 लाख की ठगी
पैसे fake company accounts में ट्रांसफर किए गए।
कैसे हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने technical surveillance और financial tracking से जांच की।
मुख्य घटनाक्रम:
- आरोपी गौतम सिंह (25) गिरफ्तार
- उसके बाद फरहान (30) को पकड़ा गया
- दूसरे केस में अंकुश को गिरफ्तार किया गया
जांच के दौरान bank account kits और mobile phones बरामद हुए।
पुलिस की एडवाइजरी और आगे की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है:
- unknown calls और messages पर भरोसा न करें
- investment से पहले verify करें
- किसी भी fraud की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दें
इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
Conclusion
Delhi Police Cyber Crime Crackdown ने यह दिखाया है कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और इससे बचने के लिए जागरूकता जरूरी है।
इस कार्रवाई से न केवल बड़े fraud cases का खुलासा हुआ है बल्कि लोगों को भी सावधान रहने का संदेश मिला है।
DISCLAIMER:
यह खबर Delhi Police द्वारा जारी 11/04/2026 प्रेस रिलीज पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जन जागरूकता है। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग की वेबसाइट से सत्यापन अवश्य करें।










